Tik Tok पर लडकिया क्या करती है ?
आज सोशल मीडिया का उपयोग जहां अच्छे काम के लिए हो सकता है वहीं इससे कुछ ज्यादा अश्लीलता भी परोसी जा रही है और हम सब इन सब से आंखें मूंदे हुए स्वीकार कर रहे हैं Tik Tok बच्चों और युवाओं को जिस अश्लीलता की राह पर धकेला जा रहा है वह सोचनीय है हम अपनी सांस्कृतिक परंपरा एवं विरासत को भूल कर तुरंत में कुछ भी करने को उतारू हो गया है अश्लीलता को हमने पॉप कल्चर के रूप में अपने दिनोंदिन जीवन में उतार लिया है इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं आज नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति से लगाओ खत्म हो गया है क्योंकि वह संस्कृति से परिचित ही नहीं हो पा रहे है हमने अपने पुरानी पीढ़ी द्वारा बनाए गए गीतों को गाना छोड़ दिया है अब हम सब कुछ फिल्मों की धुन पर गाये जा रहे हैं जिसका आधार आज पश्चिमी संगीत होता है जबकि हमारे पास अपना संगीत है अपने गीत हैं अपनी कला है किंतु अश्लील प्रोग्राम बनाए जा रहे हैं उनका अपनी जमीन, अपनी धरोहर से कोई लेना देना नही हैं यह सिर्फ टाइम पास कर रहे हैं
समय का सदुपयोग नहीं कर रहे बच्चों को निर्लज्ज बनाना अश्लीलता के जाल में इतना फ़साना वह भी जीवन भर इसी में अटके अटके रहे यही स्ट्रिक्ट ऑफ जैसे प्रोग्राम का उद्देश्य है मूल चिंतन और सामाजिकता से दूरी क्षणिक सुख की में ही लिप्त होते जा रहे है जहां तार्किकता नहीं होती इस किस्म की अश्लीलता का जाल बिछाकर नई पीढ़ी का समय खत्म कर रहे हैं उन्हें राह से भटका रहे है, हमें समय रहते जगना होगा और नई पीढ़ी को उस सच्चे जमीनी कार्यक्रम बनाकर देने होंगे ताकि नई पीढ़ी इन नसों से निकल सके इस तरह की अश्लीलता और फूहडता कि सभ्य समाज में कोई आवश्यकता नहीं है इस बात को समझ कर अच्छे प्रोग्राम उसकी जगह बच्चों को दिखाया जाए क्योंकि विकल्प के अभाव से बच्चे गंदे प्रोग्राम की ओर खींचते चले जाते हैं उन्हें इस सच्चाई से रूबरू करवाना समय की मांग है और उनके लिए क्या भला है क्या गलत है यह समझ उनके भीतर पनप सके और वह गलत प्रोग्राम के सम्मोहन से निकल सके |
Tik Tok का हमारी संस्कृति पर असर
जैसे हम कोई घर बनाते हैं और उससे आग लगाकर आशियाना जला देते हैं दोनों उपयोग और दुरुपयोग है वैसे इंटरनेट की भी अच्छे और बुरे उपयोग है यह हमारे ऊपर है कि हम इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं एक चिंगारी से घर जल जाता है और एक शमा घरों को रोशन करती है वैसे ही इंटरनेट भी हमें अच्छी जानकारी देता है वहीं इसके अंधेरे पक्ष भी है और हमेशा सफेद पक्ष में भेद नहीं कर पा रहे आज Tik Tok जैसे कार्यक्रम फूहरता की सारी सीमाएं पार कर दी है जिसमें मासूम ने बच्चों को फूहड़ता व अश्लील तरीके से नाचना सिखा रहे हैं ऐसी क्या मजबूरी है कि हमने गंदे मनोरंजन को अपना लिया और अच्छे बुरे का भेद करना ही बंद कर दिया यही हमारी कमजोरी बन गई है कि हम मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता अपना लेते है तो उसे जीवन शैली का एक अंग बना कर हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनती है तो फिर हम ना तो कुछ सोच पाते हैं ना समझ पाते हैं हम सिर्फ क्षणिक सुखों के लिए जीते हैं तत्काल सुख प्राप्ति के लिए अपने भविष्य को दांव पर लगाए हैं हमने तभी तो Tik Tok जैसे प्रोग्राम को जीवन का एक हिस्सा बना रहे हैं अब बच्चे उटपटांग हरकतें करेंगे तो दोष किसका कारण उन्हें तो आपने यही सिखाया दिखाइए जिस पर नई जनरेशन चल पड़ी है आसानी से मिलने वाली सफलता और आसानी से कमाया जाने वाला पैसा दोनों नहीं टिकते, Tik Tok की दुनिया कैसे टिकेगी यह हमें समझना होगा जो नृत्य और संगीत की विधिवत शिक्षा के बगैर हम बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं ना वह उल जलूल तरीके से हाथ में और उसे भव्य प्रयास को हम नृत्य संगीता का नाम देते है, तो यह अपने सर को गिराना है हमें इंटरनेट पर बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी मिलती है शिक्षा मिलती है पर हम गलत राह पर जा रहे हैं बच्चों को ही गलत राह पर चलना सिखा रहे हैं कि हमें गलत ही परिणाम मिलेंगे हमें भुगतना पड़े, इससे पहले जाइये और Tik Tok जैसे बद्दी प्रोग्राम पर लगाम लगाओ तब सही कार्यक्रम पेश किए जाएंगे जनता को पहल करनी होगी वरना ऐसा ना हो कि देर हो जाए। सही सुंदर प्रोग्राम बनाओ और पेश करो Tik Tok पर आज की पीढ़ी को बरगलाया जा रहा है उन्हें जीवन की सच्चाई से दूर किया जा रहा है जिंदगी चंद लम्हों का खेल नहीं है दोस्तों पर Tik Tok ने लड़के, लड़कियों को दो लम्हे जीने को सिखा रहा है जिंदगी एक लंबी तपस्या है, अभ्यास है और वास्तविकता भी ऐसे फूहर्णता भरे जोक से नहीं बताया जा सकता, हमें हर हाल में जीवन की सच्चाई से लड़ना होगा और इंटरनेट जो क्षणिक उत्तेजना दिलाने के नाम पर युवाओं को राह से भटका रहे यही आज हमारे प्रगति के मार्ग का रोड़ा बना है यह सच है कि मनोरंजन से हम तरोताजा महसूस करते हैं ताजा हो जाते हैं किंतु ऐसे मनोरंजन का स्तर भी तो होना चाहिए यह प्रोग्राम हमे बर्बाद कर दे तो ऐसे मनोरंजन को अपना होगा इसी तरह इंटरनेट सही उपयोग पर हमारी सोच बननी चाहिए आज इंटरनेट एक मजाक बन गया जो पढ़े लिखे लोगों को आत्म केंद्रित और योनि के सुखों में लिप्त कर रहा है यह कहना ज्यादा उचित होगा कि इंटरनेट मनोरंजन की ओर उन्मुख कर रहा है जहां यौन संबंधों पर ही वीडियो बने और देखे जा रहे हैं ऐसी सीरीज बने तो क्या हम इसे यौन गुलामी की ओर कदम उठाना नहीं कहेंगे यह सेक्स गुलामी की ओर ले जाने वाली प्रणाली में तब्दील हो रहा है इंटरनेट आज एक ऐसा माध्यम बन गया है जहां लोग योनि सुख तलाश में, एडल्ट सीरीज बनाई जा रही है, पोर्न मूवी बन रही है, पोर्न सीरीज बनाई जा रही है और यौन उत्तेजना कर अन्य वर्ग तैयार हो चुका है जिसे अपने यौन सुख के अलावा किसी से कुछ लेना देना ही नहीं है जो यौन सुखों की खातिर तमाम हदों को पार कर रहे हैं नैतिकता की तो कोई बात ही नहीं की जा रही कोई मापदंड नहीं बनाए जा रहे हैं इंटरनेट का मतलब है योनि क्यों मौज मजे कर लिए जाएं ऐसी एकपक्षीय सोच में मानसिकता पलट चुकी है तब हम इंटरनेट को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार कर सकते हैं हमारे लिए क्षणिक सुख ही सब कुछ ना हो वरना कुछ इंसानियत भी हो मान मर्यादा भी हो तब इंटरनेट का सही ज्ञान वर्धक उपयोग हो पाएगा दोस्तों यह था
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